मंगलवार, 2 जून 2020

पतंग - आलोक धन्वा, कक्षा - 12वीं (आधार पाठ्यक्रम)

दिन जल्दी जल्दी ढलता है - हरिवंश राय बच्चन, कक्षा १२वीं (आधार पाठ्यक्रम)   https://www.youtube.com/watch?v=5b-AVAtMuA0&t=255s

आत्मपरिचय, हरिवंश राय बच्चन, कक्षा 12 (आधार पाठ्यक्रम ) भाग - 2 https://www.youtube.com/watch?v=kQYt_YAfsew&t=133s

आत्मपरिचय - हरिवंश राय बच्चन (कक्षा -12वीं आधार पाठ्यक्रम) पार्ट - 1



गुरुवार, 24 अगस्त 2017

दरख़्त

खोदता रहा 
मैं स्वयं अपनी ही जड़ें, 
कभी सुबह-कभी शाम
लिए - हाथों में खुरपी और फावड़े, 
आखिर कब तक बनी रहेंगी 
सामाजिकता की मज़बूत
और टिकाऊ जड़ें--
एक दिन आ ही गया
वह समय,
स्वयं जब मैंने
अपने ही हाथों से;
गिरा दिया अपने विश्वास का एक अनश्वर दरख़्त----!

© हर्ष 

मंगलवार, 17 मई 2016

विषधर

आज 
देहधारी विषधरों ने सभा की
सचेत किया सभी को 
कि वे बचाएँ अपना विष 
मनुष्यों से ! 
जिसने उनके हलाहल पर
अपना दावा ठोक दिया
सबसे ख़तरनाक
विषधर ने तर्क दिया
कि वे अब हमारे जैसे
दिख रहे हैं !
चारों ओर उनके
विष वमन से
आहत !
हो रहे हैं अबाल वृद्ध l 

© हर्ष

शुक्रवार, 26 फ़रवरी 2016

भारतीय गणतंत्र की 67वीं वर्षगाँठ प्रत्येक भारतीय के लिए चिंतन अवसर लेकर आयी है l आज चिंतन करना होगा देश की आंतरिक सुरक्षा, शांति और उन्नति को लेकर l चिंतन करना होगा देश में महामारी की तरह फैले भ्रष्टाचार,आतंक, हत्या, बलात्कार और धार्मिक विद्वेष फैलाकर रोटियाँ सेंकने वालों के खिलाफ़ l सभी को तय करनी होंगी अपनी-अपनी जिम्मेदारियाँ l जो जिस क्षेत्र में जहाँ भी है उसे सार्थक पहल करनी ही होगीl तभी आतंक की ओर बढ़ती इस दुनिया में हम और हमारी संतति सुरक्षित रह सकेगी l 
भारतीय गणतंत्र चिरायु हो ...................जय हिन्द !!!!!!!